ग्रामेऽस्ति भारतस्यात्मा
बहुत्वं च मनुष्यता
सर्वथा घोषितं येन
नमस्तस्मै महात्मने ||
मातृभाषा समायुक्ता
वृत्तिज्ञान क्रियान्विता |
शिक्षोक्ता कृषिसंभूता
नमस्तस्मै महात्मने ||
सेवाशान्ति
र्श्रमस्थैर्यं
त्यागसत्यतपोरत: |
तारतम्य निहन्ता स
नमस्तस्मै महात्मने ||
गान्धी मोहनदासेति
संजात: पोरबन्दरे |
न्यायवादी स्थितप्रज्ञ:
नमस्तस्मै महात्मने ||
एकता वस्त्रसारल्यं
स्वाधिकार: सहिष्णुता
मार्गेषु च गतं येन
नमस्तस्मै महात्मने ||
No comments:
Post a Comment